
मैं तुम्हारा लंड अपने मुँह में लेना चाहती हूँ – सिया की गांड मारी
विक्रम, एक लंबा और मांसल भारतीय व्यक्ति, जिसका जबड़ा तराशा हुआ था और गहरी, तीखी आँखें थीं, पाँच साल से शादीशुदा था। उसका जीवन काम और घर की एक नीरस दिनचर्या थी, जब तक कि वह स्थानीय जिम में सिया से नहीं मिला। वह किसी भी महिला से अलग थी जिसे उसने कभी देखा था, उसके पतले, एथलेटिक शरीर, ऊँची गाल की हड्डियाँ और लंबे, लहराते बाल थे। उसे देखते ही पता चल गया था कि उसे उसे पाना ही है।
उनकी पहली मुलाकात संक्षिप्त थी, सिर्फ़ मुस्कुराहटों का आदान-प्रदान और एक त्वरित परिचय। विक्रम को एक बिजली की चिंगारी महसूस हुई, लेकिन वह जानता था कि इसे तुरंत लागू करना बेहतर नहीं है। इसके बजाय, उसने अधिक बार जिम जाना शुरू कर दिया, हमेशा यह सुनिश्चित करते हुए कि वह सिया के समान समय पर हो।
एक दिन, विशेष रूप से गहन कसरत के बाद, उसने उसे कोने में अकेले स्ट्रेचिंग करते हुए पाया। वह चिंतित होने का नाटक करते हुए उसके पास गया। “तुम ऐसा लग रहा हो कि तुम खुद को बहुत ज़्यादा मेहनत कर रही हो,” उसने अपनी आवाज़ धीमी और शांत करते हुए कहा।
सिया मुस्कुराई, उसकी आँखें उसकी आँखों से मिलीं। “मुझे खुद को चुनौती देना पसंद है,” उसने जवाब दिया, उसकी साँस थोड़ी उखड़ी हुई थी।
विक्रम को इच्छा की लहर महसूस हुई। “शायद तुम्हें किसी ऐसे की ज़रूरत है जो तुम्हें चुनौती दे सके,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में इशारे थे।
सिया ने भौंहें उठाईं, उसके होठों पर एक चंचल मुस्कान थी। “क्या ऐसा है? और वह कौन हो सकता है?”
विक्रम झुक गया, उसकी आवाज़ फुसफुसाहट से थोड़ी ऊपर थी। “मैं।”
सिया हँसी, लेकिन उसकी आँखों में एक जिज्ञासा थी। “तुम शादीशुदा हो, विक्रम। मुझे किसी की रखैल बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है।”
विक्रम मुस्कुराया, उसका हाथ उसकी बाँह को छू रहा था। “किसने रखैल बनने के बारे में कुछ कहा? मैं आपसी समझौते की बात कर रहा हूँ। कुछ… रोमांचक।”
सिया की साँसें रुक गईं, और विक्रम को पता चल गया कि वह उसके पास है।
उनकी पहली मुलाक़ात उसके अपार्टमेंट में हुई। सिया कमरे में दाखिल हुई, उसकी आँखें उसे स्कैन कर रही थीं, उसके चौड़े कंधों और सुडौल शरीर को देख रही थीं। विक्रम ने दरवाज़ा बंद कर लिया, उसका दिल उसकी छाती में धड़क रहा था।
“तुम घबराई हुई लग रही हो,” सिया ने कहा, उसकी आवाज़ नरम थी।
विक्रम ने हँसते हुए कहा, उसकी आँखें उसकी आँखों से मिलीं। “मैं घबराई हुई नहीं हूँ। मैं उत्साहित हूँ।”
सिया मुस्कुराई, उसकी आँखें इच्छा से चमक रही थीं। “अच्छा।”
विक्रम करीब आया, उसका हाथ उसके चेहरे को थामने के लिए आगे बढ़ा। वह झुक गया, उसके होंठ उसके होंठों से टकरा रहे थे। सिया ने तुरंत जवाब दिया, उसके होंठ अलग हो गए, उसकी जीभ उसकी जीभ से मिल गई। विक्रम ने चुंबन को गहरा किया, उसकी जीभ उसके मुँह को टटोल रही थी, उसका स्वाद ले रही थी।
उसने खुद को पीछे खींच लिया, उसकी साँस उखड़ रही थी। “तुम स्ट्रॉबेरी की तरह स्वाद लेती हो,” उसने फुसफुसाया, उसका हाथ उसकी गर्दन से होते हुए उसके कॉलरबोन तक गया।
सिया मुस्कुराई, उसकी उँगलियाँ उसकी शर्ट के बटन खोल रही थीं। “यहाँ आने से पहले मैंने स्मूदी पी थी।”
विक्रम ने हँसते हुए कहा, उसकी शर्ट फर्श पर गिर गई। “मुझे लगता है कि अब एक अलग तरह की स्मूदी का समय आ गया है।”
सिया की आँखें चौड़ी हो गईं, उसके होठों पर मुस्कान खेल रही थी। “क्या ऐसा है?”
विक्रम ने सिर हिलाया, उसके हाथ उसके ब्लाउज की ओर बढ़े। “हाँ। बहुत मीठा।”
उनके कपड़े जल्दी-जल्दी फर्श पर गिर गए, उनके शरीर एक-दूसरे से दब गए। विक्रम के हाथ सिया के शरीर को टटोल रहे थे, उसकी कमर के वक्र, उसके कूल्हों की उभार को छू रहे थे। वह नीचे झुका, उसके होंठ उसके निप्पल को पकड़े हुए थे, उसकी जीभ उस पर घूम रही थी। सिया कराह उठी, उसकी उंगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं।
“विक्रम…” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में इच्छा भरी हुई थी।
विक्रम ने ऊपर देखा, उसकी आँखें उसकी आँखों से मिलीं। “हाँ?”
सिया ने अपने होंठ काटे, उसकी आँखें चमक रही थीं। “मैं तुम्हें अपने अंदर चाहती हूँ।”
विक्रम मुस्कुराया, उसका हाथ उसके पेट से होते हुए उसकी योनि तक गया। उसने पाया कि वह गीली और तैयार है, उसकी उंगलियाँ आसानी से उसके अंदर सरक रही थीं। सिया कराह उठी, उसके कूल्हे उसके हाथ से टकरा रहे थे।
“तुम बहुत गीली हो,” विक्रम ने बड़बड़ाते हुए कहा, उसकी उंगलियाँ उसके अंदर-बाहर हो रही थीं।
सिया ने सिर हिलाया, उसकी साँसें छोटी-छोटी उखड़ रही थीं। “मुझे और चाहिए।”
विक्रम ने अपनी उंगलियाँ हटा लीं, सिया की विरोध की कराहें कमरे में गूंजने लगीं। वह हँसा, खुद को उसकी टाँगों के बीच में रखते हुए। “धैर्य रखो,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
वह नीचे झुका, उसकी जीभ उसकी चूत को नीचे से ऊपर तक चाट रही थी। सिया कराह उठी, उसकी उंगलियाँ उसके बालों में उलझी हुई थीं। विक्रम ने जारी रखा, उसकी जीभ उसकी क्लिट पर घूम रही थी, उसकी उंगलियाँ उसके अंदर वापस जा रही थीं। सिया की कराहें तेज़ होती गईं, उसका शरीर उसके शरीर से टकरा रहा था।
“विक्रम…” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ हताशा से भरी हुई थी।
विक्रम ने ऊपर देखा, उसकी आँखें उसकी आँखों से मिलीं। “क्या है, सिया?”
सिया ने अपने होंठ काटे, उसकी आँखें चमक रही थीं। “मैं तुम्हारा लंड अपने मुँह में लेना चाहती हूँ।”
विक्रम ने भौंहें उठाईं, उसके होठों पर एक मुस्कुराहट थी। “क्या ऐसा है?”
सिया ने सिर हिलाया, उसका हाथ उसके लिंग को छूने के लिए आगे बढ़ा। “हाँ। मैं तुम्हारा स्वाद लेना चाहती हूँ।”
विक्रम ने खुद को उसके ऊपर रख लिया, उसका लिंग उसके मुँह से कुछ इंच की दूरी पर था। “फिर खोलो, बेबी,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
सिया ने वैसा ही किया जैसा उसे बताया गया था, उसके होंठ खुले, उसकी जीभ उसके लिंग की नोक को छूने के लिए आगे बढ़ी। विक्रम कराह उठा, उसके कूल्हे आगे की ओर बढ़े, उसका लिंग उसके मुँह में सरक गया। सिया ने उसे अंदर ले लिया, उसका सिर ऊपर-नीचे हिल रहा था, उसकी जीभ उसके लिंग के चारों ओर घूम रही थी।
“Fuck, सिया,” विक्रम कराह उठा, उसकी उंगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं। “तुम इसमें बहुत अच्छी हो।”
सिया कराह उठी, उसका मुँह उसके लिंग से भर गया। उसने उसे और अंदर ले लिया, उसकी नाक उसके पेट से सट गई। विक्रम कराह उठा, उसका लिंग उसके गले के पिछले हिस्से से टकराया।
“Fuck, सिया,” उसने कराहते हुए कहा, उसके कूल्हे तेजी से हिल रहे थे। “तुम मुझे एक पेशेवर की तरह डीप थ्रोट कर रही हो।”
सिया कराह उठी, उसकी उंगलियाँ पकड़ रही थीं उसकी गांड को सहलाते हुए, उसे अपने करीब खींचते हुए। विक्रम कराह उठा, उसका लिंग उसके मुंह में अंदर-बाहर हो रहा था, उसकी लार उसके लिंग पर लगी हुई थी।
“मैं वीर्यपात करने वाला हूँ, सिया,” उसने कराहते हुए कहा, उसकी उंगलियाँ उसके बालों में कस रही थीं। “सब निगल जाओ, बेबी।”
सिया ने सिर हिलाया, उसका मुंह उसके लिंग से भर गया, उसका गला उसे अंदर लेने के लिए काम कर रहा था। विक्रम कराह उठा, उसका लिंग धड़क रहा था, उसका वीर्य उसके मुंह में भर रहा था। सिया ने निगल लिया, उसका गला उसे अंदर लेने के लिए काम कर रहा था।
विक्रम ने बाहर निकाला, उसका लिंग सिया की लार से चमक रहा था। उसने उसकी ओर देखा, उसके होठों पर एक मुस्कुराहट थी। “तुम एक गंदी लड़की हो, है न?”
सिया मुस्कुराई, उसके हाथ उसके लिंग को छूने के लिए आगे बढ़े। “और तुम्हें यह पसंद है।”
विक्रम ने खुद को उसकी टांगों के बीच रखते हुए मुस्कराया। “तुम्हें पता नहीं है।”
उसने एक तेज गति से उसके अंदर प्रवेश किया, सिया कराह उठी जब उसने उसे अंदर भरा। “चोदो, विक्रम,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी उंगलियाँ उसकी पीठ में धंस रही थीं।
विक्रम हिलने लगा, उसके कूल्हे उसके कूल्हों से टकरा रहे थे, उसका लिंग उसके अंदर और बाहर सरक रहा था। सिया कराह रही थी, उसके पैर उसकी कमर के चारों ओर लिपटे हुए थे, उसके कूल्हे उसके साथ तालमेल में चल रहे थे।
“तेज़, विक्रम,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी साँसें छोटी-छोटी साँसों में आ रही थीं। “ज़ोर से।”
विक्रम ने आज्ञा मानी, उसके कूल्हे तेज़ी से हिल रहे थे, उसका लिंग उसके अंदर और बाहर ज़ोर से आ रहा था। सिया कराह रही थी, उसका शरीर उसके शरीर से टकरा रहा था, उसकी चूत उसके लिंग के चारों ओर कस रही थी।
“हाँ, विक्रम,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आँखें उसके लिंग से चिपकी हुई थीं। “मुझे ज़ोर से चोदो।”
विक्रम कराह रहा था, उसका शरीर उसके शरीर से टकरा रहा था, उसका लिंग उसे पूरी तरह से भर रहा था। सिया कराह रही थी, उसका शरीर उसके शरीर से टकरा रहा था, उसकी चूत उसके लिंग के चारों ओर कस रही थी।
“मैं करीब हूँ, विक्रम,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी साँसें छोटी-छोटी साँसों में आ रही थीं। “मैं झड़ने वाली हूँ।”
विक्रम ने सिर हिलाया, उसका शरीर तेज़ी से हिल रहा था, उसका लिंग उसके अंदर और बाहर ज़ोर से फिसल रहा था। “मेरे लिए वीर्यपात करो, सिया,” उसने कराहते हुए कहा, उसकी उंगलियाँ उसके कूल्हों में धंस रही थीं। “मेरे लिंग पर वीर्यपात करो।”
सिया कराह उठी, उसका शरीर उसके खिलाफ़ ऐंठने लगा, उसकी चूत उसके लिंग के चारों ओर कस गई। विक्रम कराह उठा, उसका शरीर उसके खिलाफ़ ज़ोर से टकरा रहा था, उसका लिंग उसे पूरी तरह से भर रहा था।
“Fuck सिया,” उसने कराहते हुए कहा, उसका शरीर उसके संभोग के बल से हिल रहा था। “तुम बहुत ज़्यादा कसी हुई हो।”
सिया मुस्कुराई, उसका शरीर अभी भी उसके संभोग के बल से काँप रहा था। “मुझे और चाहिए, विक्रम,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी उंगलियाँ उसके जबड़े के वक्र को छू रही थीं। “मुझे तुमसे और चाहिए।”
विक्रम ने ठहाका लगाया, उसका शरीर अभी भी उसके शरीर से सटा हुआ था। “तुम्हें और मिलेगा, बेबी,” उसने अपनी आवाज़ धीमी करते हुए कहा। “तुम्हें जितना संभालना है, उससे ज़्यादा मिलेगा।”
उनका अफेयर जारी रहा, हर गुजरते दिन के साथ एक दूसरे के लिए उनकी चाहत बढ़ती गई। उन्होंने एक दूसरे के शरीर, अपनी कल्पनाओं, अपनी सबसे गहरी इच्छाओं को तलाशा। उन्होंने हर संभव स्थिति में चुदाई की, उनके शरीर एक दूसरे से लिपटे हुए थे, उनकी कराहें हवा में गूंज रही थीं।
एक दिन विक्रम ने कुछ नया सुझाया। “मैं तुम्हें किसी और के साथ देखना चाहता हूँ,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
सिया ने भौंहें उठाईं, उसके होठों पर मुस्कान थी। “क्या ऐसा है?”
विक्रम ने सिर हिलाया, उसकी आँखें इच्छा से चमक रही थीं। “हाँ। मैं तुम्हें दूसरे आदमी का लिंग लेते हुए देखना चाहता हूँ जबकि तुम मेरा लिंग चूसती हो।”
सिया ने अपने होंठ काटे, उसकी आँखें उसकी आँखों से मिल गईं। “तुम्हारे दिमाग में कौन है?”
विक्रम मुस्कुराया, उसका हाथ उसके गाल को छूने के लिए बढ़ा। “मैं किसी को जानता हूँ। वह बहुत बड़ा है, सिया। वह तुम्हें पूरी तरह से भर देगा।”
सिया ने सिर हिलाया, उसके होठों पर मुस्कान थी। “मुझे यह आवाज़ अच्छी लगी।”
वह दिन आ गया, विक्रम और सिया एक मंद रोशनी वाले कमरे के बीच में खड़े थे, उनकी आँखें भीड़ को देख रही थीं। विक्रम ने उस आदमी को देखा जिसे वह सोच रहा था, उसकी आँखें उसकी आँखों से मिल गईं। उसने सिर हिलाया, उसके होठों पर एक मुस्कुराहट खेल रही थी।
वह आदमी उनके पास आया, उसकी आँखें सिया की आँखों से मिल गईं। “मैं रोहन हूँ,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
सिया मुस्कुराई, उसका हाथ उसकी बाँह को छूने के लिए आगे बढ़ा। “मैं सिया हूँ। यह विक्रम है।”
रोहन ने सिर हिलाया, उसकी आँखें विक्रम को देख रही थीं। “मैंने तुम्हारे बारे में सुना है,” उसने धीमी आवाज़ में कहा। “मैंने तुम्हारी विकृतियों के बारे में सुना है।”
विक्रम ने मुस्कुराते हुए कहा, उसका हाथ रोहन की बाँह को छूने के लिए आगे बढ़ा। “और मैंने तुम्हारी विकृतियों के बारे में सुना है। चलो देखते हैं कि हम एक दूसरे को संतुष्ट कर सकते हैं या नहीं।”
उन्होंने 69 से शुरुआत की, सिया ऊपर थी, उसकी चूत रोहन के चेहरे पर थी, उसका मुँह विक्रम के लंड से भरा हुआ था। विक्रम ने देखा कि रोहन की जीभ उसकी चूत को चाट रही थी, उसकी कराहें हवा में भर रही थीं। वह कराह उठा, उसका लिंग उसके मुँह में अंदर-बाहर हो रहा था, उसकी जीभ उसके लिंग के चारों ओर घूम रही थी।
“Fuck, सिया,” उसने कराहते हुए कहा, उसकी उंगलियाँ उसके बालों में उलझी हुई थीं। “तुम एक गंदी लड़की हो, है न?”
सिया कराह उठी, उसका मुँह उसके लिंग से भर गया, उसकी योनि रोहन की जीभ के चारों ओर कस गई। विक्रम ने देखा कि रोहन की उंगलियाँ उसके अंदर घुस गईं, उसका लिंग यह दृश्य देखकर धड़क रहा था।
“Fuck, रोहन,” उसने कराहते हुए कहा, उसके कूल्हे तेज़ी से हिल रहे थे। “अपने लिंग से उसे भर दो।”
रोहन ने आज्ञा मानी, खुद को सिया की टाँगों के बीच में रखते हुए, उसका लिंग आसानी से उसके अंदर सरक रहा था। सिया कराह उठी, उसका शरीर उसके शरीर से सटा हुआ था, उसकी योनि उसके लिंग के चारों ओर कस गई थी।
“Fuck, रोहन,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आँखें विक्रम की आँखों से मिल गई थीं। “तुम बहुत बड़े हो।”
विक्रम मुस्कुराया, उसका हाथ रोहन की गांड को छूने के लिए आगे बढ़ा, उसे मार्गदर्शन दे रहा था। “रोहन, उसे जोर से चोदो,” उसने धीमी आवाज़ में कहा। “उसे वो दो जो उसे चाहिए।”
रोहन ने सिर हिलाया, उसका शरीर तेजी से हिल रहा था, उसका लिंग जोर से उसके अंदर और बाहर फिसल रहा था। सिया कराह उठी, उसका शरीर उसके खिलाफ तड़प रहा था, उसकी चूत उसके लंड के चारों ओर कस रही थी।
“हाँ, रोहन,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी साँसें छोटी-छोटी साँसों में आ रही थीं। “ज़ोर से।”
विक्रम ने देखा, उसका लंड सिया के मुँह में अंदर-बाहर हो रहा था, उसका शरीर उसके कामोन्माद के बल से हिल रहा था। उसने देखा कि रोहन का शरीर सिया के शरीर से टकरा रहा था, उसका लंड उसे पूरी तरह से भर रहा था। उसने देखा कि सिया का शरीर ऐंठ रहा था, उसका कामोन्माद उसके अंदर से निकल रहा था।
“Fuck सिया,” उसने कराहते हुए कहा, उसका शरीर उसके कामोन्माद के बल से हिल रहा था। “तुम बहुत ज़्यादा टाइट हो।”
रात जारी रही, उनके शरीर एक-दूसरे से लिपटे हुए थे, उनकी कराहें हवा में भर रही थीं। उन्होंने एक-दूसरे के शरीर, अपनी कल्पनाओं, अपनी सबसे गहरी इच्छाओं का पता लगाया। उन्होंने हर संभव स्थिति में चुदाई की, उनके शरीर जोश से जल रहे थे, उनके दिमाग में वासना भरी हुई थी।
उनका अफेयर जारी रहा, एक-दूसरे के लिए उनकी इच्छा हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जा रही थी। वे जानते थे कि यह गलत है, वे जानते थे कि यह खतरनाक है, लेकिन उन्हें इसकी परवाह नहीं थी। वे अपनी वासना, अपने जुनून, अपनी इच्छा से भस्म हो गए थे। वे एक-दूसरे से भस्म हो गए थे।



